Real Time Operating System in Hindi – रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम बात करने जा रहे हैं Real Time Operating System in Hindi (रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम) के बारे में। इसके अलावा इस आर्टिकल में हम रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार के बारे में भी पढ़ेंगे।

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में चल रहे ऑपरेशन का ही एक भाग होता है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें तो चलिए समझते हैं की रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है?

Real Time Operating System in Hindi

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम को ऐसे सॉफ्टवेयर या कंप्यूटर एप्पलीकेशन के लिए बनाया जाता है जिनको दी गई एक निश्चित समय सीमा के भीतर दिए गए किसी टास्क को सफलता पूर्वक दिए गये समय सीमा के अंदर रिस्पॉन्स या प्रतिक्रिया करना आवश्यक होता है। यदि रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम सही समय पर प्रतिक्रिया नहीं करता है तो इससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम को RTOS भी कहा जाता है।

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  • RTOS का प्रयोग हम रियल टाइम में चल रहे एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को कंट्रोल करने के लिए करते हैं
  • RTOS बहुत फ़ास्ट ऑपरेटिंग सिस्टम होता है इसलिए यह दिये गए कमांड या ऑपरेशन को टाइम के अंदर पूरा कर सकता है।
  • Real Time Operating System का प्रयोग ATM मशीनो और रॉकेट लॉन्चर के लिए किया जाता है।
  • इस ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रत्येक टास्क के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है यदि सिस्टम उस टास्क को समय के अंदर नहीं कर पाता है तो वह टास्क faild हो जाता है।
  • रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग ज्यादातर साइंटिफिक और इंडस्ट्रियल कार्यों के लिए किया जाता है।

Types of Real Time Operating System – रियल टाइम सिस्टम के प्रकार

दोस्तों यदि हम बात करें रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार की तो यह तीन प्रकार के होते हैं जो कि आपको निम्नलिखित दिए गए हैं-

  • Hard Real Time operating system
  • Soft Real Time operating system
  • Firm Real Time operating system

Hard Real Time operating system

Hard रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग हम उन महत्वपूर्ण कार्य के लिए करते हैं जिनमें क्विक रिस्पॉन्स की आवश्यकता होती है अर्थात जिन कार्य में 1 सेकंड की भी देरी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि सिर्फ एक सेकेंड की देर होने पर ही बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

उदाहरण – उदाहरण को समझने के लिए हम समझते हैं कि जब Hard RTOS का प्रयोग किसी सेटेलाइट को प्रक्षेपित करने के लिए किया जाता है जिसमे 1 सेकंड की भी देरी नहीं होनी चाहिए जो कि एक बहुत बड़ा नुकसान कर सकता है।

सिर्फ एक सेकंड की ही देरी होने से सेटेलाइट अपने लक्ष्य से कही और जा सकता है और एक सेकंड में ही करोड़ो रूपये से बनाया गया सेटेलाइट बर्बाद हो जाता है, इसलिए इसमे Hard Real Time operating system का प्रयोग किया जाता है।

Soft Real Time operating system

Soft RTOS का प्रयोग ऐसे टास्क के लिये किया जाता है जिनमे थोड़ी सी देरी होने पर नुकसान नहीं होता है उन टास्क में थोड़ी देर होने पर भी काम चल जाता है अतः उन कार्यो में हम थोड़ी सी देर स्वीकार कर सकते हैं।

उदाहरण – Soft RTOS का प्रयोग ATM जैसी मसीनो में करते हैं जिसमे हम यदि पैसे निकालने के लिए कोई कमांड देते है तो कई बार ऐसा होता है कि प्रोसेसिंग होने में कुछ समय लग जाता है और पैसे निकलने में देरी हो जाती है और दिया गया टास्क कुछ देर से ही सही परंतु पूरा हो जाता है और इसमें हमें किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है।

Firm Real Time operating system

Firm RTOS का प्रयोग करते समय किसी भी टास्क को करने के लिए एक समय सीमा दी जाती है यदि Firm RTOS उसको दी गई समय सीमा के अंदर कार्य को नहीं करता है तो भी उसमें किसी भी प्रकार की कोई हानि नहीं होती है। जिसमें हम टास्क को थोड़ा देर से भी पूरा कर सकते हैं।

उदाहरण – आमतौर पर Firm RTOS सप्रेम मोबाइल एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर को रन करने के लिए करते हैं जिसमें यदि किसी भी प्रकार की देरी हो जाती है तो उससे कोई भी नुकसान नहीं होता है।

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे – Advantages of Real time operating system

  1. दोस्तों यदि हम बात करें रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदों के बारे में तो इसके कई सारे फायदे हैं जो कि आपको निम्नलिखित दिए गए हैं-
  2. यह सिस्टम डिवाइस में ऑपरेट किया जाता है उस डिवाइस के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का अच्छी तरह से यूटिलाइज करता है।
  3. यह सिस्टम काफी सटीक नतीजे देता है और इसमें error होने की संभावना काफी कम होती है।
  4. इस ऑपरेटिंग सिस्टम में मेमोरी को एलोकेट करना काफी आसान हो जाता है।
  5. यह ऑपरेटिंग सिस्टम उस टास्क पर अधिक फोकस करता है जो वर्तमान में Run कर रहा होता है।
  6. यह ऑपरेटिंग सिस्टम एक टास्क से दूसरे किसी अन्य टास्क में स्थानांतरित होने में ना के बराबर समय लेता है।

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान – Disadvantages of Real time operating system in Hindi

इस ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ नुकसान भी हैं जो कि आपको निम्नलिखित दिए गए हैं –

  1. यह ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय में कुछ ही टास्क को कंप्लीट करता है और सिर्फ एक टास्क पर फोकस करता है जिस कारण वह वर्तमान में चल रहे टास्क को पूरी सटीकता से करता है परन्तु कई सारे टास्क पूरे करने में सिस्टम को बहुत सारा समय लग जाता है।
  2. यह ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ कई सारे टास्क को पूरा नहीं कर पाते हैं इसलिए इस ऑपरेटिंग सिस्टम में मल्टीटास्किंग नहीं की जा सकती है।
  3. रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम को विकसित करने में बहुत अधिक पैसे खर्च होते है जिस कारण से यह बहुत अधिक महंगे भी होते हैं।
  4. इसको टास्क परफॉर्म करने के लिए स्पेशल ड्राइवर की आवश्यकता होती है जो कि काफी एक्सपेंसिव होते हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आपको Real Time Operating System in Hindi के बारे में जानकारी दी है इसके अलावा इस आर्टिकल में आपने रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार के बारे में संक्षिप्त रूप में जाना है यदि इस आर्टिकल में दी गई जानकारी आपको पसंद आई हो तो उसे शेयर जरूर करें और यदि आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं। इसी तरह की महत्वपूर्ण जानकारी को पढ़ने के लिए नोटिफिकेशन वेल को जरूर सब्सक्राइब करें।

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FAQ

क्या विंडोज एक रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम है?

MacOS, Microsoft Windows, Linux और Unix “रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम” नहीं हैं।

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता क्यों है?

आमतौर पर रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता किसी भी दिए गए टास्क को एक समय सीमा के भीतर समाप्त करने के लिए किया जाता है।

Real-time operating systems Examples

Command Control Systems, Airline traffic control systems, Heart Pacemaker, Airlines reservation system, Robot etc.

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